‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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धर्म

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बहस से बड़ी कोई बहस नहीं है ,                               
                  धरम से बड़ी कोई जागीर नहीं है  !
ये दुनिया वालो की बनाई हुई  हस्ती है ,
                  इस पर कोई  बहस मुमकिन ही नहीं है  !
क्युकी, धर्म से बड़ी कोई ज़ंजीर नहीं  है !
 
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