‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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फूल

3 comments


कितनी  प्यारी  कितनी  मोहक 
                     छूने भर से खो दे रोनक 
खुशबु से जग को महकाए 
                      भवरों का भी मन ललचाये 
इंसा के  मन को ये भाये 
                     दुल्हन को भी खूब सजाये 
भगवान के चरणों मै शीश नवाए 
                     हर मोसम मै फिर खिल जाये 
अपने रंगों से जग को महकाए 
                     सारे जग मै  प्यार फैलाये
हर घर - घर की है ये शान 
                    सब करते हैं इसका मान 
कितनी प्यारी कितनी मोहक 
                    छूने भर से खो दे रोनक !

3 Responses so far.

  1. बहुत खुबसूरत पंक्तिया है ........

    पढ़िए और मुस्कुराइए :-
    क्या आप भी थर्मस इस्तेमाल करते है ?

  2. Anonymous says:

    I really appreciate your site. Thank you for your insights and guidance.

  3. Anonymous says:

    et les os ne paraissaient pas disposes a se

 
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