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से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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बेरोजगारों... करिअर चाहिए तो नक्सली बनो

1 comments
 भारत देश में अगर कैरिअर बनाना है तो कुछ ऐसे एरिया है जहा बिना कोई योग्यता के सबसे ज्यादा सुविधाए मिलती है वो है भ्रस्ट राजनीति, नक्सली फ़ोर्स, आतंकवाद, धर्मान्तरण और तस्करी ये आइडिया है जिन्हें हमारी सरकार का फुल्ल सपोर्ट है...

           मैंने कही से उडती-उडती खबर सुनी है कि नक्सलियों के लिए केंद्रीय सरकार एक पैकेज का प्लान बनाकर बैठी है. जिसमे उन्हें उनकी संस्था से रिटायर्मेंट होने पर २ ताख रुपये का एकमुश्त फंड और ३ हजार रुपये मासिक पेंसन देने का प्रस्ताव है...साला ये खबर सुनकर तो मेरा दिल जल गया मैंने इतने पैसे खर्च किये पढने लिखने में.. इतना समय बर्बाद किया उसकी कोई वेलुच नहीं? साला आज तक बेरोजगार हू मेरे लिए १०० रुपये का भी इनाम नहीं ... खबर सुनते ही मेरे मन में भी ख्याल आया है कि वैसे तो सरकार गरीब बेसहारा, बेरोजगारों के लिए कुछ करने से रही.. और ना ही सरकार में बैठे लोगो में इतनी औकात है.. 
         अब चारा एक ही है कि अगर अपनी लिए और देश के करोडो बेरोजगार जो भूके मरने कि कगार पर है उन्हें सलाह दू कि फटाफट नक्सली आर्मी में शामिल हो जावो.. ताकि जीवन जीने के लिए काम से काम कुछ तो जुगाड़ हो जाये... वैसे तो नक्सली सुरक्षा बलों में भरती के लिए किसी योग्यता कि जरुरत नहीं होती.. फिर कौन इंडियन आर्मी,  रेलवे में धक्के मुक्की खाए, सरकारी नौकरियों के लिए घूस खिलाये, कौन ५०० रुपये में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते बैठे.. पर अगर नक्सली अपनी फ़ोर्स में भारती के लिए आनाकानी करे तो झट से अपनी खुद कि नक्सली फ़ोर्स/आर्मी/पोलिस बना लो... पर्र्र्रर्र्र ध्यान रहे कि आपकी बनी हुई फ़ोर्स का नाम नक्सली ही होना चाहिए.... गलती से कुछ और हुवा तो ठेंगा भी नहीं मिलेगा....

         देश में करोडो बेरोजगार युवा है जो दर-दर रोजगार कि तलास में भटक रहे है.. कम से कम उनका तो भला ही हो जायेगा... मेरा तो यही प्लान है बस अगर अब नौकरी ना मिली तो नक्सली संगठन बना लूँगा या तो फिर अजमल कसाब या  अफज़ल गुरु  बन जाऊंगा.. जिसका खाने पीने और रहने का ही खर्च करोडो रुपये महीने बैठता है.. और वो सब हमारे देश के  गरीबो का पेट काटकर किया जा रहा है .. या फिर कश्मीर जाकर ५०० रुपये दिन से पत्थर मारने का बिजनेस या तो फिर किसी इसाई संस्था (एनजीओ) से संपर्क कर लू और गरीबो कि सेवा के बहाने धर्मांतरण का धंधा खोल लू.. इस धंधे के लिए तो विदेशो से करोड़ों-अरबों रुपिये आते है फिर सैलेरी कि तो कोई प्रोब्लेम ही नही होगी साथ ही सरकार के धन द्वार भी २४ घंटे खुले है....
         बाबा आजकल का रुल यही है घी सीढ़ी ऊँगली से नहीं निकलता........ पर सरकार कर क्या रही है? कही हमारे देश के भविष्य हमारे नौजवानों को आतंकवादी/नक्शली या धर्मान्तरण करके इसाई बनाने का प्लान तो नहीं है ?

One Response so far.

  1. आपने बिलकुल सही कहा दोस्त देश के हालत को देख कर तो यही लगता है की एसा ही कुच्छ होने वाला है पर तुम निराश मत हो कुच्छ एसा करो जिससे तुम्हारी आवाज़ उन तक पहुच सके जो इन सब के खिलाफ हो और हमारा साथ दे सके !

 
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