‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
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एक अनाथ बच्चे कि नयी माँ

19 comments
(एक कहानी है एक बेटे माँ की और कुछ नहीं)
एक थी मॉ

जब उसके बेटे ने अपने अनाथ सहपाठी को
खेलते-खेलते एक चांटा जड़ दिया,
मामला मॉ के दरबार तक आ पहूंचा,
कचहरी में मामले की सुनवाई हुई
फैसले में मॉ ने सहपाठी बच्चे को समझाते हुए कहा
बेटा तू भी तो अपना ही है
क्या हुआ भाई ने अपने ही भाई को चांटा मार दिया?
थोड़ी बहुत नोकझोंक से तो प्यार बढ़ता है।
वो बच्चा ये सोचकर खुश होकर गया कि
वाह आज एक चांटा खाया, तो मुझ अनाथ को माँ मिल गयी ,
अगले दिन उसे तरकीब सूजी की परिवार बढ़ाया जाय,
माँ तो मिल गयी पापा का भी जुगाड़ किया जाए ,

वो गया और पिछले दिन जिसने उसे चांटा मारा था
उसे एक चांटा जड़ दिया,
इस उम्मीद में कि, मैने खाया तो मॉ (फिमेल) मिली
अब मई मारूंगा तो शायद पिताजी (मेल) मिल जाए ?

मामला फिर उसी दरबार पहूंचा।
कचहरी में मामले की सुनवाई हुई
फैसले में मॉ ने................

(अब आगे मां का रिएक्शन क्या होगा? आप लोगो की लेखनी से इस कहानी का आगे का भाग सुनना चाहूंगा। खासकर आज कि मांओ से, देखे किसका कमेंट मेरी आगे की कहानी से मैच करता है।)
**********सागर

19 Responses so far.

  1. बेटे की आवाज़ थी तो माँ केसे न आती
    फिर वही बीच- बचाव हुआ
    दोनों को माँ ने प्यार दुलार से समझया
    वो दोनों मै भेद केसे कर सकती थी
    क्युकी उसने तो उसे पहली बार मै ही
    बेटा बना लिया था
    माँ के कोमल हृदये को तो जानती हु
    पर माँ से आगे कितने रिश्ते बनेगे
    इसकी कोई खबर नहीं ?

  2. Sagar says:

    सुक्रिया मीनाक्षी जी आपने कहानी के अधूरे भाग को आपने नजरिये से पूरा किया ..
    देखें आगे और लोगो कि क्या प्रतिक्रिया मिलती है..

  3. I agree with Minakshi ji...

  4. माँ तो मिल जाती है
    मगर हर चाँटे पर
    बाप नही मिला करता
    ये ज़िन्दगी का सच
    वो जान गया था
    माँ का ह्रदय पहचान
    गया था
    अब पारिवार बढाने का
    सपना भूल गया था
    जो मिला उसी मे
    खुश रहना सीख गया था
    हर रिश्ता यहाँ नही
    मिला करता
    जो बनते हैं दिल से
    उन्ही मे सिमटना
    सीख गया था
    और इस अनमोल
    रिश्ते को अंक मे
    अपने सहेज लिया था
    माँ से बढकर
    कोई रिश्ता नही होता
    आज वो जान गया था

    फ़िलहाल तो इतना ही…………आगे आप देखिये।

  5. ZEAL says:

    .

    मीनाक्षी जी और वंदना जी दोनों से सहमत हूँ।

    .

  6. Sagar says:

    VANDANA JEE,, aapne apni lekhni kaa jaadu comment me bhi dikha diya bahut pasand aaya aapka comment. badhaayee.. hmmmm dekhiye aage ke comments me ye kahani kaise poori ki jaati hai..



    ZEAL, jee aapne 2 option chune hai par i think kisi bhi kahani ke 2 END nahi ho sakte.. END to ek hi hoga..
    dekhiye aage ke comments me ye kahani kaise poori ki jaati hai..

  7. जिस तरह आपने रचना का ताना बना बुना है ...उससे तो लगता है कि माँ अपने बेटे को अहमियत देती है ...और जिस अनाथ को पहले बेटा कहा होगा उसे प्यार नहीं उपेक्षा मिलने वाली है ..

  8. Sagar says:

    संगीता जी, कमेंट के लिए धन्यवाद

  9. Jyoti says:

    फैसले में मॉ ने सहपाठी बच्चे को दो चाटे मारते हुए कहा
    कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे बेटे को मारने की?

    तू होता कौन है हमारा?

    तुझे पहले ही समझाया नही गया तो आगे ना जाने और क्या करेगा..

    वो बच्चा ये सोच सोचकर परेसान हो गया

    कल तक तो मैने मार खायी तो मै बेटा था

    आज जब मैंने मारा तो मै कमीना बन गया?

    ऐसे कैसे हो गया ?

  10. संगीताजी और ज्योति जी से सहमत

 
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