‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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क्यों कोई नहीं डरता जनता से ?

10 comments
सुनने में उन्हें जरूर बुरा लग सकता है जो सरकार से या फ़िर सीधे पी डब्लु डी डिपार्टमेंट से जुड़े हैं , लेकिन सच तो यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के निवास से सीधे नया सर्किट हाऊस जाने वाली आधा किलोमीटर की नई बनी सड़क में चार जगह आपको लहर, उतार-चढ़ाव मिलेंगे । जब यह हाल मुख्यमंत्री के सामने की सड़क का हो सकता है तो सोचिए बाकि जगह काम कैसा होता होगा ? मुख्यमंत्री निवास से विधानसभा जाने वाला मार्ग की टायरिंग इससे पहले कि बार उखड़ चुकी है । हफ़्तों अखबारों के पन्ने रंगे रहे इनकी खबरों से । हर साल बनने वाली यह सड़क जिसके दोनो ओर नेता प्रतिपक्ष, मंत्रियों , मुख्य सचिव अन्य अधिकारियों के बंगले हैं वह उखड़ती है और किसी को कोई फ़र्क तक नहीं पड़ता । ठेकेदार का रुतबा कम नहीं होता , उसे और नए नए काम दिये जाते हैं । क्या है यह सब ? क्यों कोई नहीं डरता जनता से  ?  

10 Responses so far.

  1. ये सड़कें तो साहब लोग कमिसन में ही खा जाते है.. भाई साहब, पूरा प्रसाशन तंत्र भ्रष्ट हो गया है, भाई साहब बहुत मुस्किल इसे सुधार पाना.. सुधारने कि पहल करे भी तो कौन? पहला कदम उठाएँ तो कौन? कौन है जो इस कीचड़ में न रंगा हो? अब तो लगता है यही नियति और यही किस्मत है..

  2. अरे दोस्त समझा करो वो तो जान कर ख़राब की हुई है ताकि देशवासियों का ध्यान वही बना रहे और सब उनकी इस हालत पर तरस खा सके !

  3. Jyoti says:

    भयी इन सड़कों के मारे तो हमने गुजरना छोड़ दिया
    कभी दिल करे शैर की तो पंख फैला लेते है.
    कौन करे इन जालिमो से मुक़ाब्ला..
    ये नजर भी आए तो हम चैनल बदल लेते है..

  4. Jitendra Malviya says:

    Bahut achhi pol kholi aapne badhaayee

  5. सिर्फ़ छतिसगद ही नही भाई जी सारे देश में यहि हाल है

    कुतर -कुतर कर खा रहे है ये राक्शस हमारि भारत माँ को.. हमारे परम पुज्य योग श्रिशि स्वामी रामदेव जी ने कदम रखे है इनकी मांद में उनका सहयोग कीजिये और देखिये कहा तक नींव हिला पाते है इनकी .. अपनी बखत आने दीजिये उखाद कर ही फेंक देंगे..

  6. Ajeet Shakya says:

    well coverage

  7. ZEAL says:

    .

    जिनती आत्मा मर चुकी है , नैतिकता दफ़न हो चुकी है , ऐसे लोग विराजमान हैं सत्ता में , इसलिए इनके भवन के आगे भी ऊँची-नीची सडकें बनती हैं, क्यूंकि ये इसी के लायक हैं। रही बात जनता की , तो जनता को कीड़ा-मकौड़ा समझा जाता है । आम जनता की परेशानियों से किसी को कोई सरोकार नहीं है।

    .

  8. Good to see a Hindi Blog that too on such a sensitive topic.

    Trip to Shimla

  9. बहुत अच्छा प्रयास है देश वासिओं को नींद से जगाने का
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