‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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अपनी - अपनी सोच

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कोई तुमसे प्रेम करेगा , तो कोई घृणा !
कोई तुम्हारी प्रशंशा करेगा , तो कोई निंदा !
कोई तुम्हारा समर्थन करेगा , तो कोई खंडन !
संसार का यही विधान है ! तुम इस पर ध्यान न देते हुए इश्वर पर विश्वास रखो और सत्य के धरातल पर अपने  मनोबल को ऊँचा रखते हुए केवल अपना कर्तव्य करते चले जाओ !
 
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