‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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जिंदगी

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हथेलियों मै पानी सी कभी ठहरती ही नहीं , 
मुठ्ठी मै रेत बन के फिसल जाती है ! 
पकड़ना तो कई बार चाहा है मैने उसे , 
बंद आँखों के खुलते ही खो जाती है ! 
मस्त पवन सी  झूमती सी आती है , 
आंधी की तरह सब कुच्छ उड़ा ले जाती है !  
कडकती धूप मै जब पांव मेरे जलते हैं , 
झट से  बदलों की छाँव वो  बन जाती है !   
ख़ुशी मिले मुझे तो वो दूर मुझसे होती है  
गम के आते ही वो मरहम का काम करती है ! 
हर राह मै वो  साथ मेरे चलती है , 
सुख - दुःख का लेखा - जोखा रखती है ! 
मेरे दुःख मै बिन बादल ये बरसती है , 
ख़ुशी मिले तो ये  धूप बनके खिलती है !
 जब एक हसीन ख्वाब मै बुनती हु , 
तुझको तो मै साथ लेके   चलती हु ! 
हर ख्वाब सच भी तो नहीं होता ...........
उस वक्त बढकर तेरा हाथ थाम लेती हु !
तेरी हिम्मत से नया ख्वाब में बुनती  हु !
फिर बेखोफ आगे का सफ़र तय  करती  हु !

5 Responses so far.

  1. तेरी हिम्मत से नया ख्वाब में बुनती हु !
    फिर बेखोफ आगे का सफ़र तय करती हु !

    sunar panktiyan

  2. प्रिय,

    भारतीय ब्लॉग अग्रीगेटरों की दुर्दशा को देखते हुए, हमने एक ब्लॉग अग्रीगेटर बनाया है| आप अपना ब्लॉग सम्मिलित कर के इसके विकास में योगदान दें - धन्यवाद|

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