‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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सावन की फुहार

15 comments

नाचत - गावत आई बहार 
क्यारी - क्यारी फूलों सी महकी 
चिड़ियाँ नाचे दे - दे ताल 
नाचत -  गावत आई बहार !
भवरों की गुंजन भी लागे 
जेसे गाए गीत मल्हार 
रंग बिरंगी तितली देखो 
पंख फैलती बारम्बार 
नाचत - गावत आई बहार !
मोर - मोरनी  भी एसे  नाचे  
जेसे हो प्रणय को तैयार 
थिरक - थिरक अब हर कोई देता 
अपने होने का  आगाज़ 
नाचत गावत आई बहार !
हर कोई अपने घर से निकला 
करने अपना साज़ - श्रृंगार 
सबका मन पंछी बन डोला 
मस्त गगन मै फिर एक बार 
नाचत -  गावत आई बहार !
चिड़िया असमान मै नाचे 
तितली गाए गीत मल्हार 
मै तो इक टक एसे देखूं 
जेसे मैं हूँ   कोई चित्रकार 
नाचत -  गावत आई बहार !

15 Responses so far.

  1. वसंत में सावन की फुहार ? बहरहाल मन तो भीग ही गया बेमौसम की बारिश में ! अच्छी कविता . सराहनीय प्रस्तुति.

  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (10/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

  3. मन को भिगोती सुंदर रचना .......

  4. मन को भिगोती सुंदर रचना .......

  5. aap sabka shukriya dosto

  6. बहुत बढ़िया प्रस्तुति.

  7. Anonymous says:

    i have visited this site a couple of times now and i have to tell you that i find it quite nice actually. keep it up!

  8. Anonymous says:

    Sauerstoff eingewirkt hat,

 
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