‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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क्या ये मेरी खता थी?

9 comments

तेरे दामन से जो लिपट गयी चुनरी मेरी
दुनिया ने कहा मेरे चलने में खता थी
हवा ने रूख मोड़ा और उड़ गयी वो
बता तो क्या ये सिर्फ मेरी खता थी?
..
फिसलती राहो से गुजरते गिरी तेरे बाहो में
दुनिया ने कहां मेरी राह चुनने की खता थी
तेरी मासूम सूरत देखी और राह भटक गई
बता तो क्या ये सिर्फ मेरी खता थी?
..
दुनिया समझने मैं चली, खोया दिल तेरे हाथों में
दुनिया ने कहा खरीददार चुनने में खता थी
दिलों का मेला इतना बड़ा भूल हुई चुनने में
बता तो क्या ये सिर्फ मेरी खता थी?
..
ये गया तू मेंरी ख्वाबो की पंखुड़िया बिखराकर
दुनिया कहती है, मेरी खुशबू में कमी थी
हर पुष्प की अभिलाषा है रे भौरे तू
बता तो क्या ये सिर्फ मेरी खता थी?

9 Responses so far.

  1. सुंदर अभिव्यक्ति के लिए आभार

  2. बहुत सुन्दर एहसासों से सजाई गई खुबसूरत रचना |
    और हाँ खता कभी अकेले की नहीं होती दोस्त दोनों की मिली जुली होती है |
    सुन्दर रचना |

  3. अच्‍छी रचना। सुंदर अहसास। दिल के करीब लगी आपकी यह पोस्‍ट।

  4. kori says:

    कभी अकेले की नहीं होती दोस्त दोनों की मिली जुली होती है |
    सुन्दर रचना |
    anurag kori

  5. Anonymous says:

    This is cool! And so interested! Are u have more posts like this? Please tell me, thanks

  6. Anonymous says:

    clases ha sido el factor principal de las,

 
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