‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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देश के समक्ष आतंरिक एवं ब्राह्य समश्याये तथा उनका समाधान

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संघ सामान्य विषयो की चिन्ता नहीं करता, राष्ट्रीय विषयों की चिन्ता करता है। और दृढ़तापूर्वक समाधान हेतु प्रयत्न करता है। हमने 1857 की क्रांति से बहुत कुछ सीखा है। हमें नई दृष्टि, नूतन चिंतन प्राप्त हुआ है। इस क्रांति की असफलता के पीछे बाह्य कम आंतरिक चुनौतियाँ हमारे समक्ष अधिक थी, आज भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अभी कुछ ही समय पूर्व पदस्थ सरकार ने रामसेतु को तोड़ने का दुःसाहस किया, किन्तु जिस गति के और तत्परता के साथ हिन्दू समाज संगठित होकर आगे आया, यह सबने देखा और समझा है। आज देश के सामने अनेक समस्याएँ है। जैसे कश्मीर समस्या। सन् 1946 में शेख अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर छोड़ों आन्दोलन, पंडित नेहरू को महाराजा हरिसिंह द्वारा कश्मीर आने से रोकना, फलस्वरूप नेहरू के मन में क्षोभ, कश्मीर पर हमला, असमंजस की स्थिति, परम पूज्य श्री गुरुजी द्वारा महाराजा हरिसिंह को भारत में विलय करने के लिए राजी किया गया। किन्तु कश्मीर में भारत के विरूद्ध अनेक स्वर जो उठ रहे हैं, उसके पीछे विदेशी पड़यंत्र स्पष्ट परिलक्षित होता है। विभिन्न आतंकवादी संगठनों का जन्म पाकिस्तान स्थित सरहद में हुआ है। लगातार आजादी के बाद से वह छद्म युद्ध लड़ रहा है। पाकिस्तान प्रत्यक्ष लड़ाई में जीत नहीं सकता इसका बोध उसे है। हमारी मातृभूमिं के मस्तक पर यह घाव नासूर बना हुआ है। हमें लगातार इसके विरूद्ध जनमत तैयार करना है। आज स्थिति यह है कि कश्मीर के 6 जिलो में हिन्दू नगण्य हो गये है, तथा अन्य जिलो से निकालने की तैयारी चल रही है। हजारों लाखों हिन्दू परिवार अपना सब छोड़कर दिल्ली में विस्थापितों का जीवन यापन कर रहे है। जो हमारे लिए अत्यन्त लज्जा का विषय है। धारा 370 में कारण अलगांव बढ़ा है। दो विधान, दो प्रधान, दो निशान के विरूद्ध पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आन्दोलन चलाया तथा वे शहीद हुए। आज भी समाधान, सही दिशा में करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। कश्मीर को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका उसका भारतीय संघ में पूर्ण विलय है। अनुच्छेद 370 के साथ-साथ पृथक ध्वज पृथक संविधान को समाप्त करना आवश्यक है। पूर्वान्चल में सात प्रदेश है। 1813 से अंग्रजो द्वारा हिन्दू समाज के लोगों को ईसाई बनाने का प्रयत्न चल रहा है। फलस्वरूप आज वहाँ 80 प्रतिशत ईसाई बन चुके है। अंग्रेजो ने हमारी मूल व्यवस्थाओं पर भयंकर कुठाराघात किये है। जैसे कुँवारे लड़को को अलना सुलाने की व्यवस्था को बंद किया। तिरंदाजी को बंद कराया, गौमाँस खिलाकर परिवार में ही भेद खड़ा किया। छोटी लड़की पर सम्पत्ति की देखरेख का अधिकार होने के कारण, ईसाइयों का उससे विवाह करना एवं सम्पत्ति पर कब्जा करना। असम में जिस गति से विधर्मी बढ़ रहे है। बंगलादेश के घुसपैठिये असम प्रांत को बंगलादेश में मिलाना चाहते है। हमारे राष्ट्र के अन्दर घुसपैठ, जनसंख्या वृद्धि, मतान्तरण के द्वारा पूरब-पश्चिम को जोड़ने वाले भाग में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ाने का षड़यंत्र और प्रयत्न चल रहा है। जिससे उत्तर एवं दक्षिण भारत अलग-अलग भू-भाग में परिवर्तित हो जायेंगे। कश्मीर से कन्याकुमारी के बीच ईसाइयों का राष्ट्र विरोधी प्रयत्न जोरों से चल रहा है। चीन की विस्तारवादी नीति अपने लिये संकट है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा को रोकना, अरूणाचल पर दावा करना, तिब्बत को हड़पने का प्रसंग सर्वविदित है। भारत की निकटवर्ती सीमाओं में सड़के, हवाई पट्टियाँ, युद्धक सामग्री की भारी मात्रा में उपलब्धता चीन के कुत्सित मनोभावों का परिचायक है। अमेरिका की तरह चीन भी विस्तारवादी, नीति का अनुसरण कर रहा है। नेपाल में माओवादियों का वर्चस्व अपने राष्ट्र के लिए संकट है। माओवादियों ने भारत के दस प्रदेशांे में अपना जाल फैला दिया है। लोकतंत्र में उनका विश्वास नहीं है। नकारात्मक वातावरण निर्माण करना उनका सर्वोपरि ध्येय है। नेपाल से लेकर आन्ध्रप्रदेश तक अपना राज्य स्थापित करने का प्रयत्न कर रहे है। इसी तरह राष्ट्र विरोधी कार्याे में वामपंथियों का हमेशा ही सहयोग रहा है।

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हमारी आंतरिक समस्याओं में जातिवाद, अस्पृश्यता तथा संचार माध्यमों द्वारा निर्ममतापूर्वक हमारे आदर्श जीवन मूल्यों पर जो आक्रमण हो रहे है; चिन्ता का विषय है। संगठन के अन्तर्गत हमने एक मॉडल खड़ा किया है। समरसता, एकात्मता, स्वदेशी वेषभूषा, भाषा आदि का भाव जिसे हमने संगठन में खड़ा किया है। इसका समूचा दर्शन समाज में जाना चाहिये। राष्ट्र की समस्त समस्याओं का समाधान लोक जागरण के माध्यम से ही संभव होगा। जनचेतना को झंकृत करने के निमित्त हमें रात-दिन योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है। हमें ध्यान देना पड़ेगा कि अपनी शाखा ही लोक जागरण के लिए साध्य और साधन है। संघ के बारे में स्वयं अधिकाधिक जाने, संघ साहित्य का नियमित स्वाध्याय करंे। अन्यो को प्रेरणा दें, सदैव सतर्क रहें, अन्यों को सतर्कता की प्रेरणा दें। युवा पीढ़ी को खड़ा करें। स्वाभाविक अवस्था में गति से काम करें। प्रतिपल राष्ट्र की आत्मा से तदाकार होकर समसामयिक घटनाओं, परिस्थितियों पर तीक्ष्ण दृष्टि रखें। स्वयं, साथियों सहित समाधान खोजे, पहल करें।
 
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