‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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मुहब्बत सच और झूठ में नहीं

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मुहब्बत सच और झूठ में नहीं फसती वो तो दिल से मन के बीच चलती है।
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कब तक यू ही दूर भागोगे? कभी तो मुड़कर हमसे नजरे मिलावोगे॥
नजर मिलेगी तो बात भी होगी ॥ ऐसा तो नहीं कि मुह बंद कर मुह चिढावोगे ?
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मै कैसे कहू कि कब तक साथ दूंगा तेरा?
मै तो साया हू जब दिल करे पीछे मुड़कर देख लेना
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अब बस यही दुआ है कि तुम थोडा आराम करो तो मुझे कुछ चैन मिले
साया हू न कभी -कभी थक जाता हू
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बीते हुए लम्हे हमेशा दर्द भरे होते है ॥
इसलिए उन्हें अपने अरमानो के साथ ही जला देता हूँ मै
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कोई सास लेना भी कभी भूल सकता है भला?
वो तो ज़िंदा है मेरे दिल में धड़कने बनकर

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सागर....
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ये ठोकर मेरी गलती कि सजा थी

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इसमें तेरी खता नहीं कि,
ये ठोकर मेरी गलती कि सजा थी,
चलने से पहले ही, निगाह की होती तो,
मखमल में दबे कंकड़ निगाह में होते॥
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आह पे आह लेते है तेरी आने कि आहट पे॥
दिल को यकीन क्यों नहीं होता कि तेरी आहट
सिर्फ मेरी निगाह में है॥
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वो हर बार गुनाह पे गुनाह का इल्जाम लगाते गए॥
और मै शर्मिंदा होता गया ..
सुकर है उनकी बेवफाई का ..
मुझे पता तो चला कि मै बेगुनाह था॥
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इतनी अनमोल धरोहर तुझपे लुटा बैठे॥
कुछ पल के विश्वास पे जिंदगी दे बैठे॥
पता न थे खुले जो तेरे राज मेरे जाने के बाद, वरना
सजी थी सूली खुद कि जगह तुझे सुला देते ॥
******************************@ सागर


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प्यार

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क्या करेगा प्यार वो ईमान को ,
क्या करेगा प्यार वो भगवान को !
जन्म लेकर गोद मै इन्सान की ,
कर न पाया प्यार जो इन्सान को !
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एहसास

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क्या कहे केसी हसीं वो शाम थी !
ना जाने किसकी याद हमारे पास थी !
सर्द हवाओ का प्यारा सा एहसास था !
मद मस्त मंद-मंद हवाओ का प्यार था !
जान कर हम ना जाने क्यु अनजान थे !
मीठे -मीठे दर्द से आज भी  बेजान थे !
 सर्द हवाए जेसे बदन को छु रही थी !
प्यारी-२बाते किसी की दिल मै उतर रही थी!
मीठे २ दर्द का एहसास  दिल के करीब था !
कहते भी कीससे हर कोई हमसे जो दूर था !
रात ने भी जेसे २ दस्तक देना शुरू किया !
नीद ने भी अपनी आग़ोश मै लेना शुरू किया !
बात जहां से शुरू हुई वही पर ख़तम हुई !
यादे भी अपने  पंख समेटे हमसे विदा हुई !
अब ना जाने हमको वो अपना कब पैगाम सुनाएगी  !
प्यारे प्यारे छोको से फिर से हमे जगाएगी !
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MOTIVATION

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क्या हम हर किसी को अपना बना सकते है ?
क्या हम अपनी जुबान में मिठास भर सकते है  ?
क्या हम अपनी टीम का विश्वास जीत सकते है ?
क्या हम दूसरो की उन्नति को अपनी उन्नति समझ सकते है ?
यदि आपके जवाब सही में हां है तो........ 
 आपको  सफलता के शिखर पर पहुचने से कोई नहीं रोक सकता
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