‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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प्रभु की उद्धार करने की दुकान

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"उद्धार पाने के आशान्वित लोगो के लिए धर्मांतरित कर उद्धार करने वाले प्रभु का विशेष पेकेज?"

आजकल कोई भी वेबसाईट खोले या गूगल सर्च करें वहां ऊपर, नीचे या वेब पेज के साईड में आपकों एक लाईन लिखी हुई मिल जाएगी- ‘‘मैं यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकारता हूं’’ ‘‘मैं परमेश्वर का पुत्र बनना चाहता हूं’’ ‘‘हॉं मैं उद्धार पाना चाहता हूं’’। इन्ही वाक्यों के साथ एक बेनर पर एक फोटो भी लगा होता है। जिज्ञासा में ज्यादातर लोग उसपर क्लिक कर बैठते है। यहां से शुरू होता है उद्धारकर्ता का उद्धार करने का खेल जो कहां जाकर रूकता है। यह तो वही बता पाएंगे जो लोग ये यात्रा कर चुके है। हमने कई बार यह राज जानने की कोशीष की कि प्रभु को इंटरनेट पर अपने विज्ञापन देने की जरूरत क्यू पड़ गई? लेकिन प्रभु के सेल्समेन इतने प्रवीण होते है कि वो किसी के हाथ नहीं आते।
मैंने थोड़ी सी छानबीन करने की कोशीष की जो इस प्रकार है- प्रभु के विज्ञापन पर क्लिक करने पर एक पेज खुलता है। उस पर गम्भीर चिंतनीय मुद्रा में मॉडल की तरह दिखने वाली एक महिला आखे बंद कर दोनों हाथ एक दुसरे में भीचे हुए माथे से सटाए हुए चित्र नजर आता है और वहा भी दो नये टेब मिलते है जिसके माध्यम से पूछा जाता है, कि क्या आपने कभी प्रार्थना की है? पहले टेब के रूप में उत्तर में नहीं लिखा होता है जिसके साथ एक वाक्य ‘परन्तु मैं और जानना चाहता हूं’ ओर दूसरे टेब में हॉ ‘मुझे यकीन है कि मैंने प्रार्थना की हैं’ दिखाई देते है। इनपर क्लिक करने पर एक फार्म खुलता है जिसमें आप अपनी नीजी जानकारी भरकर आगे बढ़ते है। आगे एक और पेज खुलता है जिसमें कुछ कोटेशन के और बच्चों के फोटोग्राफ के साथ दो और टेब दिये हुए होते है जिसमें पहले में ‘प्रार्थना की ओर जाए’ लिखा होता है जिसपर क्लिक करते ही एक फार्म खुलता है जिसमें आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरकर प्रभु के पुत्र बनने की ओर कदम बढ़ा सकते है। यदि आप इससे संतुष्ट नहीं है तो आप दूसरा टेब क्लिक करेंगे जिसे क्लिक करते ही आप ऐसे पेज पर जाएंगे जहां कुछ युवाओं की दारूण कहानी पढ़ने को मिलेगी जो पहले मुख्य रूप से प्रसिद्ध व्यापारी नितिन काले, बलजिन्दर, राजू लोहार के स्टेटमेंट आप देख सकते है। पूरा का पूरा नेटवर्क आपके दिमाग में सिर्फ इतनी बात डालने के लिए होता है कि प्रभु के बिना आपका कोई उद्धार नहीं कर सकता। यह पूरा धंधा धर्मांतरित हिन्दू युवको-युवतियांे के माध्यम से चलाया जा रहा है। इससे यह सिद्ध होता है कि यह पूरा कारोबार धर्मांतरण का गोरख धंधा है। इस तरह की वेबसाईटो पर प्रभु के झण्डाबरदार हमेंशा ऑनलाईन या टेलीफोन के माध्यम से आपको दिशानिर्देश देने हेतु उपलब्ध है। मैने जितनी भी बार इन विज्ञापनों के अंदर जाने की कोशीष की है। सारे सवाल जवाब महिलांए करती है जो पूरी तरह से प्रशिक्षित और हर परिस्थिति को बरदास्त करने के लिए तैयार होती है। ज्यादातर धर्मांतरित हिन्दुओं की तरह वे अपनी स्थिति छुपाते हुए बताती है कि वे भी हिन्दु ही है परन्तु दुनिया में प्रभु यीशु के अलावा कोई और उद्धार नहीं कर सकता। आप उन्हे कितना भी उनके मूल धर्म के बारे में बात करों उनके कान में जू नहीं रेंगती।
इतने वृहद स्तर पर किये जा रहे विज्ञापनों से कई प्रश्न एकसाथ खड़े होते है। इनके लिए पैसा कहां से आता है? कही ऐसा तो नहीं की विश्व के बड़े-बड़े उद्योगपति जिन्होने अपनी आधी-आधी सम्पत्ति दान में कर दी है, वह सम्पत्ति इन्ही विज्ञापनों के काम आ रही है? इतने बड़े स्तर पर लोगो का उद्धार कर ये लोग करवाना क्या चाहते है? मान लिया पूरा भारत भी धर्मांतरित करवा लिया गया, उसके बाद ये लोग क्या करेंगे? आज देश के पॉच राज्य ऐसे है जहां धर्मान्तरण, पलायन आदि करके हिन्दुओं को अल्पसंख्यक कर दिया गया है। उसके दुस्परिणाम हम लोग भुगत भी रहे है। उद्धार का यह कारोबार धर्मान्तरण के रास्तों से होकर राष्ट्रांतरण तक जाता है। सरकार, प्रेस सभी माध्यमों का इस्तेमाल आज राष्ट्रविरोधी तत्व धड़ल्ले से कर रहे है, पर हम सब मूकदर्शक बने हुए है। कोई कुछ नहीं कहता और कहेगा भी क्यूं? किसी को क्या पड़ी है देश के भले बूरे से।



 
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