‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
Powered by Blogger.
 

संघ कार्यपद्धति की विशेषताए

0 comments

(एक दृष्टि में)

- संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है।
- योग्य वाहकों के माध्यम से भगवान कार्य करते है, स्वयं नहीं।
(महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की तरह।)
- ईश्वरीय कार्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति को निमित्त बनना पड़ेगा।
- कार्य जितना महत्व का है, उतना ही महत्व है उसको करने वाले का।
- विशिष्ट प्रकार के व्यक्ति समाज में चाहिए, यह मूलभूत आवश्यकता है। अपनी अनोखी कार्यपद्धति से व्यक्ति का निर्माण होता है, यह बयासी वर्षों से सिद्ध हो चुका है।
- अपनी कार्यपद्धति अनुभव के आधार पर विकसित है। परमपूज्य डॉ. साहब ने 1914 से 1925 तक अनेक प्रयोग किये। संघ स्थापना के पश्चात् 1939 सिन्धी की बैठक में गहन विचार विमर्श के पश्चात् कार्यपद्धति को सुनिश्चित किया गया।
- अपनी कार्यपद्धति देश, काल, परिस्थिति निरपेक्ष है। कार्यपद्धति का आधार श्रद्धा और विश्वास है। कुछ बातों को तर्क से नहीं समझा जा सकता है और न ही समझाया जा सकता है।
- अंतःकरण के विश्वास से शाखा चलती है।
- श्रद्धा से काम करने वाला ही सफल हो सकता है। आपको ज्ञात है, संजय गांधी एवं नक्सलवादियों द्वारा शाखा चलाने का असफल प्रयास किया जा चुका है।
- हम मनुष्य का उत्पादन नहीं, निर्माण करते है।
- अपना काम यांत्रिक नहीं, जीवंत है।
- अपने काम का आधार शुद्ध सात्विक, प्रेम एवं आत्मीयता है।
- यहां एक-एक व्यक्ति का सम्मान एवं महत्व है, किन्तु व्यक्ति के प्रति मोह नहीं है।
- शाखा पर स्वयंसेवकों के हिसाब.किताब का उदाहरण सभी के लिए प्रेरक है।
- हम ध्येय के पूजक है। संघ का स्वयं सेवक हूँ। यह भाव चाहिए। किसी स्थान व किसी व्यक्ति द्वारा निर्मित हूँ, यह भाव नहीं चाहिए।
- संघ आचरण की छोटी.छोटी बातों पर ध्यान देता है एवं आग्रह करता है।
- आग्रह के कारण व्यक्ति दूर नहीं जाता अपितु जुड़ता है।
- भाषण या बौद्धिक से व्यक्ति का निर्माण नहीं होता, अपितु सम्पर्क, घनिष्ठता तथा आत्मीयता से व्यक्ति का निर्माण होता है।
- संघ स्वयंसेवको के समर्पण भाव से चलता है।
- स्वयं का जीवन और समय देकर स्वयंसेवक कार्य करता है।
- संघ को तात्कालिक लोकप्रियता की जरूरत नहीं है। संघ स्वावलंबी एवं स्वतंत्र है। इसलिए डंके की चोट पर सच.सच बोलता है। यह बनाये रखने की आवश्यकता है।
- पक्षी अपने बलबूते पर ऊपर उड़कर जाता है। सूखा पत्ता हवा के साथ जाता है और गिरता है। संघ पक्षियों के समान है।
- हम अपने ढंग से कार्य करते है, प्रचार करते है। मीडिया का प्रभाव तीन दिन तथा अपने सम्पर्क का प्रभाव तीन जन्म अर्थात अपने कार्य का मूलाधार लोक सम्पर्क है।
- अपना काम, निष्काम कर्मयोग है।
- अपनी कार्यपद्धति की विशेषता को समझकर कार्य को आगे ले जाना है।
..............
 
Swatantra Vichar © 2013-14 DheTemplate.com & Main Blogger .

स्वतंत्र मीडिया समूह