‘‘सच्चाई-निर्भिकता, प्रेम-विनम्रता, विरोध-दबंगता, खुशी-दिल
से और विचार-स्वतंत्र अभिव्यक्त होने पर ही प्रभावी होते है’’
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परिणामों की उम्मींद में इतना उतावलापन क्यों?

9 comments
कृष्णा बारस्करः
                      अभी हाल ही में देश में हुए लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े उलटफेर द्वारा बनी मोदी सरकार से निश्चित ही आम जनता को बड़ी-बड़ी उम्मीदें है। पिछले 10 वर्ष के शासनकाल में कुशासन, भ्रष्ट्राचार, महंगाई जैसे बहुत से गम्भीर मुद्दों से तृस्त जनता जल्द से जल्द समस्या मुक्ता होन चाहती है। 
                      नई सरकार जनता की इन अपेक्षाओं को जानती है, समझती है, शायद इसीलिए नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2014 को चुनाव में पूर्ण बहुमत मिलते ही देश की समस्याओं एवं आवश्यकताओं पर काम करना चालू कर दिया था। मोदी सरकार ने 26 मई को शपथ ग्रहण किया जिसे एक सप्ताह भी नहीं हुआ है ऐसे में भी कुछ लोग है जो अभी से किसी बड़े परिणाम की चाह में सोशल मीडिया सहित विभिन्न संचार के माध्यमों पर हल्ला मचाने लगे है, परन्तु यहां सवाल यह उठता है कि परिणाम के लिए इतना उतावलापन क्यों? और वह भी तब जब त्वरित परिणाम की चाह ऐसे लोगों को अधिक है जो पिछली सरकार के 10 साल का कुशासन चुपचाप बरदास्त करते रहे।
                      जब भी देश में नई सरकार का गठन होता है तो वह अपने तय एजेण्डे के अनुसार कार्यो के समय का निर्धारण करती है। कुछ योजनाएं त्वरित होती है तो कुछ दीर्धकालीन होती है जो कई वर्षो या दसकों बाद परिणाम प्रदान करती है। फल खाने के लिए पहले बीज बोना होता है, पौधा उगने पर उसे पानी देकर बड़ा करना होता है, फिर जब वह पेड़ बन जाये तब उससे फल की आशा करनी चाहिए। नवनिर्वाचित सरकार योजनाओं पर अमलीजामा पहनाने में जुटी है ऐसे में थोड़ा सब्र किया जाना चाहिए। यदि बिल्कुल सब्र नहीं हो रहा हो तो इस फालतू समय में पूर्ववर्ती सरकार से तुलना करते रहे। मोदी जी की कार्य करने की गति और शैली पर भरोषा रखे। भरोषा रखे जनता ने एक व्यक्ति के भरोषे पूरा देश सौपते हुए उसे पूर्ण बहुमत दिया है, उसमें कोई बात तो होगी। 
                      किसी भी सरकार के कार्यो की समिक्षा का उचित समय उसके कार्यकाल की पूर्णता पर ही किया जाना चाहिए। हालाकि इसका मतलब यह भी नहीं है कि सरकार पूर्णतः गलत कदम उठाती चले और हम मूकदर्शक बने रहे। जिसपर पूर्ण विश्वास करके देश की तकदीर बदलने का जिम्मा सौपा है से परिवर्तन के लिए समय तो देना ही होगा। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते थे ‘‘मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, कि समस्याओं का हल चुटकियों में कर सकुं’’ परन्तु यह कहते हुए वे समस्याओं के समाधान के लिए किसी प्रकार के कोई कदम भी नहीं उठाते थे। वर्तमान सरकार के साथ ऐसा नहीं है, वह देश की हर समस्या पर नजर बनाए है और आवश्यकतानुसार त्वरित कदम उठाने के साथ ही जनता के साथ पारदर्शिता बनाये रखती नजर आती है। हमें इंतजार करना चाहिए ‘‘अच्छे दिन आ रहे है।’’ पेड़ बड़ा हो रहा है जल्द ही फल खाने को भी मिल जायेंगे। 

9 Responses so far.

  1. आज की ब्लॉग बुलेटिन विश्व तम्बाकू निषेध दिवस.... ब्‍लॉग बुलेटिन में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    सादर आभार !

  2. सार्थक लेख ।
    आपकी बात से सहमत ।

  3. Anonymous says:

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